महिलाओं द्वारा झूठे मामले के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना
महिला अगर अपने पति या ससुराल वालों के खिलाफ झूठा मुकदमा, जैसे कि 498A या दहेज निषेध अधिनियम अंतर्गत, दायर करती है, तो क्या इसके नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने तेलंगाना में एक हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें यह संकेत दिया गया कि बिना ठोस सबूतों के परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपित नहीं किया जा सकता है। यह निर्णय इस बात पर केंद्रित है कि पारिवारिक विवाद आमतौर पर पति-पत्नी के बीच होते हैं, और इसमें अन्य रिश्तेदारों का नाम लेना बिना ठोस आधार के न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। कानूनी प्रणाली में नई प्रक्रियाओं के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के सेक्शन 248 में जानबूझकर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए झूठा केस दर्ज करने पर दंड की बात कही गई है। इसमें जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान है। उन्होंने झूठे मामलों के खिलाफ कानूनी उपायों को समझाया और बताया कि कैसे महिलाएं और परिवारों को इस तरह के मामलों का सामना करना पड़ सकता है। Highlights ⚖️ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: झूठे आरोपों पर ठोस सबूत की आवश्यकता। 👩⚖️ महिलाओं की कानूनी सख्ती: दहेज निषेध अध...